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Wednesday, 24 February 2016

तेरी मोहब्बत की पाक ज़ुबान



तेरी मोहब्बत की पाक ज़ुबान
मेरे कीचड़ दिल को कमल दे गयी
अब कीचड़ देखूं या पन्ने पलटती ख्वाब बूनूँ
मेरी रात की आंख फडकने लगी
शगुन पड़ने का अच्छा शगुन दे गयी
सदियों जो शिकवे किये
रंगों से परे जो मटमैले सपने बुने
तेरी मोहब्बत की पाक ज़ुबान
उन सपनों में रंग भर गयी
रात के अंधेरे में ,
मेरी ज़िंदगी के तालाब को रोशन कर गयी
उंची आसमानी दीवार को
पूनम के चांद की रोशनी दे गयी
टहनी पर टंगे मन को खुश्बू से लाद गयी
तेरी मोहब्बत की पाक ज़ुबान
मेरे हुस्न को इश्क़ के रंग से नहला गयी
मेरी नज़्म को कागज़ दे गयी
और मेरे होने को वजूद दे गयी
तेरी मोहब्बत की पाक ज़ुबान
मेरे इश्क़ को हदें दे गयी !!!!!!!!!! नीलम !!!!!!!!!!

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