“संयोजन, एक प्रक्रिया है दो को मिला कर एक बनाने
कि, चाहे वो दो चीजें हों , दो दिल हों या फिर दो शरीर इनका संयोजन ही इन्हें एक
बना रहा है मेरी रचनाओ में , विकृत और अपने सही आकर की अपेक्षा न करते हुए इन सब
ने मुझ पर भरोसा किया और एक दुसरे से जुडते चले गए, और मुझ से भी
!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
रंग मेरे थे पर अपनाया मेरी रचनाओ ने और ऐसे जैसे
वो इन्ही रंगों के इंतज़ार में हो, कोशिश तो की है कि इनका संयोजन वैसे ही कर पाऊं
जैसे कहीं जा कर धरती और आकाश मिल जाते है और एक दुसरे के हो जाते हैं
!!!!!!!!!!!!!”
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