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Friday, 11 September 2015

सुप्रभात



“!!!!!!!!!!! अन्धकार से रोशनी के इंतज़ार में कल रात जो मूंदी थी आँखें
नया उजाला फिर हुआ है, सूरज की किरणों को तकिये पर देख आते............
नए संघर्ष का नया है दिन,
 रोशनी फिर करेगी आज न जाने कितनी बातें !!!!!!!!!!! ”
नीलम

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